Aagra Me MLC Chunav Ko Lekar Aayog Shakt , Gorkhpur Ke Paryvekshak Badle
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के दौरान कर्तव्यों का सही से निर्वाहन नहीं करने वाले छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। आयोग ने मतदान केंद्र संख्या 21 और 26 पर बड़े पैमाने पर हुई गडबड़ियों के मद्देनजर यह कदम उठाया है। इससे पहले, आयोग ने दोनों बूथ पर दोबारा मतदान के निर्देश दिए थे। आयोग ने गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव के पर्यवेक्षक अभय सिंह को हटा दिया है।निर्वाचन आयोग ने आगरा मंडल के मंडलायुक्त (आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचन अधिकारी भी) की 25 अक्तूबर को की है। आयोग के सचिव सुमन कुमार दास की ओर से यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जारी निर्देश में कहा गया है कि अत्यंत चिंता के साथ देखा गया पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी मतदान केंद्रों के भीतर औरं आसपास प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने और उचित नियंत्रण बनाए रखने में विफल रहे। उन्होंने कहा है कि अर्यवेक्षी पदों पर तैनात अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है और इसे किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जा सकता।नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। निर्वाचन आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। साथ ही कहा कि एसआईआर के फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया। नियमानुसार इस पर बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। एसआईआर से जुड़ी राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 27 अक्तूबर को सुनवाई होगी। आयोग ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्तों डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी की आपत्तियों को दरकिनार कर अकेले फैसला ले रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष आयोग ने उन याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है. जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा अकेले फैसले लेने का आरोप लगाया गया है। हलफनामे में आयोग ने कहा, यह याचिका सिर्फ एक अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। आयोग ने बताया, उसका यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार, निर्वाचन आयुक्तों डॉ. संधू और डॉ. जोशी की सर्वसम्मति से लिया क गया है।